दुसरो के आईने बनने की ख्वाइश मिट जायेगी..!!
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काश मैं लौट जाऊँ बचपन की उन गलियों में… जहां ना कोई ज़रूरत थी, ना कोई ज़रूरी था.
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हलके में मत लेना तुम सावले रंग को,
दूध से कही ज्यादा देखे है मैंने शौक़ीन चाय के.
दूध से कही ज्यादा देखे है मैंने शौक़ीन चाय के.
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वो खुद पर गरूर करते हैं , तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं, जिन्हें हम चाहते हैं , वो आम हो ही नहीं सकते
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उनकी नजर में फर्क अब काफी है ..
पहले मुड़ कर देखते थे,
अब देख कर मुड़ जाते हैं..!!
पहले मुड़ कर देखते थे,
अब देख कर मुड़ जाते हैं..!!
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